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Thursday, December 1, 2022

लंदन।  ब्रिटेन के भारतीय मूल के पहले प्रधानमंत्री बनने जा रहे ऋषि सुनक ने हाल में कहा था कि वह ब्रिटेन-भारत संबंधों को बदलना चाहते हैं ताकि इसे दोतरफा आदान-प्रदान वाला बनाया जा सके जिससे ब्रिटेन के छात्रों और कंपनियों की भारत में आसान पहुंच हो। अगस्त में कंजरवेटिव पार्टी के भारतवंशी सदस्यों की एक सभा को संबोधित करते हुए सुनक (42) ने देश को महंगाई के ‘‘कठिन दौर” से निकालने और बेहतर, सुरक्षित ब्रिटेन का निर्माण करने का संकल्प लिया था। भीड़ की तालियों की गड़गड़ाहट से स्पष्ट था कि सुनक की भारतीय विरासत और जातीय अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि की ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने की प्रतियोगिता में कोई भूमिका नहीं है।

उत्तरी लंदन में कंजरवेटिव फ्रेंड्स ऑफ इंडिया (सीएफआईएन) संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, पूर्व वित्त मंत्री ने ‘‘नमस्ते, सलाम, केम छो और किड्डा” जैसे पारंपरिक अभिवादन के मिश्रण के साथ सभा का अभिवादन किया और हिंदी में कहा ‘‘आप सब मेरे परिवार हो।” सीएफआईएन की सह-अध्यक्ष रीना रेंजर के द्विपक्षीय संबंधों के बारे में एक सवाल के जवाब में सुनक ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि ब्रिटेन-भारत संबंध महत्वपूर्ण हैं। हम अपने दोनों देशों के बीच जीवित सेतु का प्रतिनिधित्व करते हैं।” सुनक ने कहा था, ‘‘हम सभी ब्रिटेन के लिए भारत में कारोबार और काम करने के अवसर के बारे में बहुत जागरूक हैं, लेकिन वास्तव में हमें उस रिश्ते को अलग तरह से देखने की जरूरत है क्योंकि एक बहुत बड़ा क्षेत्र है जो हम यहां ब्रिटेन में भारत से सीख सकते हैं।”

सुनक ने कहा था, ‘‘मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि हमारे छात्रों के लिए भी भारत की यात्रा करना और सीखना आसान हो, हमारी कंपनियों और भारतीय कंपनियों के लिए एक साथ काम करना भी सुगम हो क्योंकि यह केवल एकतरफा संबंध नहीं, यह दोतरफा संबंध है, और मैं उस रिश्ते में इस तरह का बदलाव लाना चाहता हूं।” भारतीय मूल के डॉक्टर पिता यशवीर और फार्मासिस्ट मां उषा के ब्रिटेन में जन्मे बेटे सुनक ने पिछले अभियान के दौरान अपनी प्रवासी जड़ों के बारे में विस्तार से बात की थी और पहले भारतवंशी वित्त मंत्री के तौर पर 11 डाउनिंग स्ट्रीट पर दिवाली के दीये जलाकर इतिहास बनाने का भी उल्लेख किया था। सुनक ने कुछ महीने पहले प्रचार के अपने वीडियो में कहा था, ‘‘मेरी नानीजी के पूर्वी अफ्रीका में एक विमान में सवार होने के साठ साल बाद अक्टूबर की एक गर्म धूप वाली शाम में, उनकी परनाती, मेरे बच्चे, हमारे घर के बाहर गली में खेलते हैं, दरवाजे पर रंगोली बनाते हैं, दीये जलाते हैं; दीपावली पर कई अन्य परिवारों की तरह मस्ती करते हैं।”

यह व्यक्तिगत कहानी उनके सास-ससुर- इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति के लिए एक भावनात्मक संदर्भ में भी विस्तारित हुई। सुनक अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति की पारिवारिक संपत्ति को लेकर निशाने पर भी रहे। पिछले कुछ महीनों में टीवी पर गरमागरम बहस के दौरान उन्होंने कहा, ‘‘मेरे सास-ससुर ने जो बनाया है, उस पर मुझे वास्तव में बहुत गर्व है।” सुनक का जन्म साउथेम्प्टन में हुआ था। एक धर्मनिष्ठ हिंदू के रूप में सुनक मंदिर में नियमित रूप से जाते हैं और उनकी बेटियां, अनुष्का और कृष्णा की भी जड़ें भारतीय संस्कृति में निहित हैं। सुनक ने हाल में साझा किया कि कैसे अनुष्का ने जून में वेस्टमिंस्टर एब्बे में क्वींस प्लेटिनम जुबली समारोह के लिए अपने सहपाठियों के साथ कुचिपुड़ी की प्रस्तुति दी।

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