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Sunday, February 5, 2023

देहरादून। प्रदेश में शराब के शौकीनों को अगले वर्ष शराब की महंगी कीमतों से थोड़ी राहत मिल सकती है। आबकारी विभाग सस्ती शराब के लिए अन्य राज्यों से हो रही तस्करी को रोकने पर गंभीरता से मंथन कर रहा है। इस कड़ी में एक सुझाव शराब की कीमतों को कमी करना भी है। फोकस इस बात पर है कि शौकीन अन्य राज्यों की सस्ती शराब की ओर आकर्षित न हों। इसके लिए कुछ नए ब्रांड भी बाजार में लाए जा सकते हैं। आबकारी विभाग प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देने वाले विभागों में शामिल है। आबकारी राजस्व पूर्ति का सबसे बड़ा जरिया दुकानों की नीलामी और शराब की बिक्री है। इसके लिए लिए वर्ष 2021 में आबकारी विभाग ने नीति बनाई थी, जो मार्च 2023 तक के लिए प्रभावी है।

इस नीति में मौजूदा वित्तीय वर्ष का राजस्व लक्ष्य 3600 करोड़ रुपये रखा गया है। वर्ष 2021 में बनाई गई नीति में यह व्यवस्था की गई थी कि शराब कंपनियां जो भी ब्रांड उत्तराखंड में बेचेंगी, यदि वे ब्रांड दिल्ली में बेचे जा रहे हों, तो उनका मूल्य दिल्ली से अधिक नहीं होगा। इस व्यवस्था का अनुपालन सही प्रकार नहीं हो पाया। उत्तराखंड की तुलना में हिमाचल प्रदेश में समान ब्रांड की शराब काफी सस्ते दरों पर मिल रही है। यही कारण है कि प्रदेश में सबसे अधिक तस्करी, हिमाचल, चंडीगढ़ और हरियाणा से हो रही है।कीमतों का अंतर इस बात से लगाया जा सकता है कि तस्करी के बाद भी ये शराब ब्लैक मार्केट में प्रदेश के मौजूदा बाजार भाव से सस्ती मिल रही है। यही अंतर तस्करी को बढ़ावा दे रहा है। इससे आबकारी विभाग के सामने चुनौतियां बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए विभाग अब वर्ष मार्च 2023 के बाद के लिए नई आबकारी नीति बना रहा है।

प्रस्तावित नीति में तस्करी रोकने, नीलामी से छूटने वाले सीमावर्ती दुकानें के आवंटन की व्यवस्था करने, वाहनों की निगरानी और दुकानों में ओवर रेटिंग को रोकने पर जोर दिया जा रहा है। इस बात का भी अध्ययन किया जा रहा है कि दो सालों में जो दिक्कतें सामने आईं, उनका क्या समाधान निकाला जा सकता है।

सचिव व आयुक्त आबकारी हरिचंद्र सेमवाल का कहना है कि नए वित्तीय वर्ष में सरकार की ओर से जो भी राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा, उसे प्राप्त करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। जहां तक नीति की बात है तो इस संबंध में हितधारकों के साथ विमर्श चल रहा है। जल्द ही इसे अंतिम रूप देकर कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

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