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Thursday, December 1, 2022

हरिशंकर व्यास
बहुत दिलचस्प संयोग है कि चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश में चुनाव की घोषणा की और गुजरात की घोषणा टाल दी। उसके बाद प्रधानमंत्री ने गुजरात जाकर कई बड़ी योजनाओं की घोषणा की। दिवाली के पांच दिन चलने वाले त्योहार शुरू होने से ठीक पहले ऐलान किया कि देश के 10 लाख नौजवानों को नौकरी दी जाएगी। इसकी शुरुआत धनतेरस से होगी। धनतेरस के मौके पर बड़ा रोजगार मेला लगेगा। प्रधानमंत्री 75 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटेंगे। इस मौके पर वे वर्चुअल तरीके से नौजवानों से बात भी करेंगे। इसके बाद अगले साल दिसंबर तक नौकरी बांटने का सिलसिला जारी रहेगा। अगले साल दिसंबर तक 10 लाख नौकरियां बांटने की घोषणा की गई है। यह भी क्या अच्छा संयोग है कि गुजरात विधानसभा चुनावों की घोषणा से ठीक पहले नौकरियां बंटनी शुरू होंगी और 2024 के लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से ठीक पहले तक मोदीजी नौकरियां बरसाते बंटती रहेंगें। यह उस सरकार की योजना है, जो करीब साढ़े आठ साल से केंद्र में है।

संदेह नहीं है कि जिस तरह से धनतेरस के मौके पर रोजगार मेला लगाने और 75 हजार नियुक्ति पत्र बांटने की घोषणा हुई है वैसे अगले पूरे साल नौकरियां बांटने का शो होगा। जैसे हर चार महीने पर किसानों को सम्मान निधि के नाम पर दो-दो हजार रुपए देने का कार्यक्रम होता है और इसके लिए बड़ा इवेंट क्रिएट किया जाता है उसी तरह नौकरी देने के भी इवेंट होंगे। एक निश्चित अंतराल पर या किसी ने किसी शुभ मौके यानी किसी न किसी हिंदू त्योहार से पहले रोजगार मेले का आयोजन होगा।  इवेंट क्रिएट किया जाएगा और हजारों-लाखों नौजवानों को नियुक्ति पत्र मिलेंगे। ध्यान रहे अभी दो राज्यों के चुनाव हैं और अगले साल कम से कम सात राज्यों के चुनाव हैं। उसके तुरंत बाद लोकसभा चुनाव का बिगुल बज जाएगा। सो, एक तरफ चुनाव चल रहे होंगे और दूसरी ओर रोजगार मेले हो रहे होगे।

इस रोजगार मेले में जिन लोगों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा, क्या वे भगवानजी की, मोदीजी की दया या कृपा या आर्शीवाद से नौकरी पा रहे होंगे? हां, प्रचार यही होगा। जब एक गरीब बुढिया को राशन बांट कर भगवानजी उससे नमक के अहसान में तमाम गरीब-गुरबों के वोट मांग सकते है तो नौकरी पाने वाला तो जीवन भर पूजा करता हुआ होगा।
और सोचे यह उस नौजवान के पुरर्षाथ, कंपीटिशन, मेहनत के साथ कैसी क्रूरता होगी। हर मंत्रालय और सरकारी विभाग अपने यहां खाली पद का विज्ञापन निकाता है,, उस पद के लिए परीक्षा होती है। इसमें शामिल होने के लिए वह एक निश्चित काबलियत पूरी करता है।  परीक्षा के बाद ही नियुक्ति होती है। यूपीएससी से लेकर एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड या इस जैसी दूसरी सरकारी एजेंसियों के जरिए अलग अलग पदों की परीक्षा होती है।  लेकिन धनतेरस से प्रचार क्या होगा? मोदीजी ने नौकरी दी। जैसे नौकरी खैरात में मिली। मानों मेले के आयोजन कर उसमें आने वालों को पकड़ कर नौकरी दी जा रही है।
भारत में सरकारी नौकरी और वह भी केंद्र सरकार की नौकरी हासिल करना हिमालय पहाड़ चढऩे जैसा है। बड़ी तपस्या और तैयारी के बाद नौजवान नौकरी के लिए होने वाली परीक्षा में शामिल होते है और कडे कंपीटिशन  के बाद उनको नौकरी मिलती है। ऐसा पहले से लगातार चला आ रहा है। हर साल यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड आदि परीक्षाओं का आयोजन करते रहे हैं और नौजवान बहाल होते हैं।

लेकिन पिछले कई सालों से किसी न किसी बहाने उन नियुक्तियों की परीक्षाएं रूकी रहीं। कई सेवाओं में पद कम कर दिए गए। कई जगह इतनी वैकेंसी निकाल दी गई कि आवेदन करने वाले बहुत हो गए और परीक्षा कराने में ही सालों निकल गए। सेना में भी कई साल से वैकेंसी रोकी गई। जब निकाली गई तो अग्निपथ योजना के तहत चार साल के लिए अग्निवीर भर्ती किए जा रहे हैं। सो, धीरे धीरे केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में लाखों पद खाली हो गए। उन सबको प्रतिस्पर्धी परीक्षा के जरिए भरा जाना है लेकिन प्रचार ऐसे हो रहा है, जैसे रोजगार मेले में आओ और नौकरी पाओ!

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