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Thursday, December 1, 2022

जालंधर।  पराली को आग लगाने और दीपावली में पटाखों की वजह से जालंधर जिला में ए.क्यू.आई. लेवल 260 तक पहुंचने से जिला जालंधर राज्य भर में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषित शहरों में दूसरे स्थान पर पंहुच चुका है परंतु प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स में कूड़े को आग लगाने के मामले चिराग तले अंधेरा की कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है क्योंकि एक तरफ जिला प्रशासन पराली को आग लगाने के अलावा कूड़े व अन्य सामग्री को न जलाने को लेकर जिले भर में जागरूकता अभियान चलाने के दावे करता आ रहा है, लेकिन रोजाना डी.सी. आफिस में कूड़े को आग लगाने के मामले प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स में सफाई व्यवस्था को दुरूस्त बनाए रखने को लेकर सफाई कर्मचारी तैनात कर रखे हैं परंतु विभागीय लापरवाही के चलते अधिकारियों के जिला की आबोहवा सही करने के प्रयासों की बजाय उल्टा खराब किए जा रहे हैं। कॉम्प्लेक्स में विभिन्न स्थानों पर प्रतिदिन कूड़े को आग के हवाले कर दिया जा रहा है, जिससे जहां जिला में प्रदूषण का ग्राफ भी बढ़ रहा है वहीं आग से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण कॉम्प्लेक्स में आने वाले सैंकड़ों लोगों व स्टाफ के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव डाल रहा है।

वहीं अगर प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स में खुलेआम आग लगाने की घटनाएं होगी तो शहर की जनता को रोकना कैसे संभव हो पाएगा। इस मामले में एडीशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) डा. अमित महाजन ने कहा कि कॉम्प्लेक्स में कूड़ा-कर्कट को आग लगाने का मामला उनके ध्यान में आया है, जिसको लेकर सफाई कर्मचारियों को सख्त हिदायतें जारी की जाएगी। इसके बाद भी अगर ऐसा कोई मामला सामने आया तो आग लगाने के दोषी व्यक्ति की पहचान करके उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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