spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
spot_img
spot_img
Tuesday, May 17, 2022
Homeउत्तराखंडचारधाम यात्रा: आसान नहीं पहाड़ पर चढ़ाई, जान ले लेगी जरा सी...

चारधाम यात्रा: आसान नहीं पहाड़ पर चढ़ाई, जान ले लेगी जरा सी ढिलाई, जरूरी एहतियात नहीं बरत रहे तीर्थयात्री

-

चारधाम यात्रा: आसान नहीं पहाड़ पर चढ़ाई, जान ले लेगी जरा सी ढिलाई, जरूरी एहतियात नहीं बरत रहे तीर्थयात्री

केदारनाथ यात्रा में चार दिनों में ही पांच यात्रियों की मौत हो चुकी है, जिसमें चार को दिल का दौरा पड़ा और एक यात्री की खाई में गिरने से जान गई। विषम भौगोलिक परिस्थितियां पहुंच मार्ग पर चढ़ाई और बदलते मौसम से यात्रियों की तबियत खराब हो रही है, जिसमें कुछ को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।

रुड़की रेलवे स्टेशन के अधीक्षक को धमकी भरा पत्र मिला, जिसमें 21 मई को लक्सर, नजीबाबाद, देहरादून, रुड़की, ऋषिकेश, हरिद्वार को बम से उड़ाने की धमकी

समुद्रतल से 11,750 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में ऑक्सीजन का दबाव काफी कम है। यहां मौसम के खराब होते ही चारों तरफ कोहरा छाने और बर्फबारी से दिन-दोपहर में ही सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। यहां कई यात्रियों को धड़कन बढ़ने, बेचैनी, चक्कर आने और सीने में दर्द की शिकायत होती है, जो हृदयाघात का कारण बनती है। सीएमएस डॉ. मनोज बडोनी ने बताया कि पोस्टमार्टम में चारों लोगों के दिल पर अधिक दबाव पड़ने से मौत होने की पुष्टि हुई है।

पहले जांच कराएं, दवा भी साथ रखें
मैदानी क्षेत्र से पहाड़ में आने के लिए यात्री अपनी स्वास्थ्य जांच कराएं और अपने साथ जरूरी दवा जरूर रखें। केदारनाथ क्षेत्र में ऑक्सीजन 55 से 57 फीसदी है, जिसमें कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत होना आम है। ऐसे में जरूरी है कि पहले से एतिहात बरतें।

https://youtu.be/4b59BFJr-JE

आक्सीजन सिलेंडर रखें, खाली पेट न रहें
केदारनाथ आने वाले यात्रियों को अपने साथ फस्ट-एड बॉक्स में छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर शामिल करना चाहिए। साथ ही गर्म कपड़े अति आवश्यक हैं। पैदल मार्ग से धाम पहुंचने वाले यात्री रास्ते में कमीज या टीशर्ट में ही चल रहे हैं। ऐसे में ऊपर पहुंचते ही ठंड से तबियत खराब हो रही है। साथ ही खाली पेट न रहा जाए और पीने के लिए गर्म पानी का उपयोग हो।

यमुनोत्री पैदल मार्ग पर अब तक 11 लोगों की जा चुकी जान
उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के दौरान हार्ट अटैक से तीर्थयात्रियों की मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मात्र सात दिन में 13 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। सबसे अधिक मौतें यमुनोत्री पैदल मार्ग पर हुई हैं। यहां अब तक 11 तीर्थयात्री हार्ट अटैक से दम तोड़ चुके हैं।

कोविड हिस्ट्री है तो यात्रा से बचें
बीते सात मई को मुंबई निवासी देवश्री जोशी (39) की यमुनोत्री पैदल मार्ग पर मंडेली गाड़ के समीप हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार देवश्री की कोविड हिस्ट्री थी। हालांकि देवश्री कोविड से तो उबर गई थीं, लेकिन फेफड़े अभी भी कमजोर थे जो यमुनोत्री पैदल मार्ग पर ऑक्सीजन की कमी नहीं झेल पाए। सीएमओ डॉ. केएस चौहान का कहना है कि यदि यात्रियों की कोविड हिस्ट्री है, तो लापरवाही न बरतें। हो सके तो पूर्ण रूप से फिट न होने पर यात्रा से बचें।

बीपी व शुगर जैसी बीमारी है तो बरतें सावधानी
अभी तक धामों में हुई मौतों में बीपी के मरीजों की संख्या अधिक है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार भी यमुनोत्री धाम पहुंचने वाले अधिकांश तीर्थयात्री मेडिकल अनफिट हैं, जिन्हें बीपी, दमा व शुगर जैसी बीमारियां हैं। चढ़ाई चढ़ने पर अक्सर शुगर लेवल गिरने की संभावना रहती है, जिससे कार्डिएक अरेस्ट होने की संभावना रहती है। वहीं यात्रा मार्ग पर अधिक चढ़ाई दमा के मरीजों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है।

यात्रा के लिए दें पूरा समय
अधिकांश यात्री ट्रेवलिंग एजेंसियों के चक्कर में आकर जल्द से जल्द चारधाम यात्रा पूर्ण करने का कार्यक्रम बनाते हैं, जो काफी खतरनाक है। चढ़ाई पर एक निश्चित सफर तय करने के बाद शरीर को आराम की आवश्यकता होती है। लेकिन तीर्थयात्री यमुनोत्री धाम के करीब 6 किमी पैदल मार्ग को कुछ ही घंटों में तय करना चाहते हैं।

तीर्थ यात्री चारधाम यात्रा में जल्दबाजी न करें। यात्रा के लिए पर्याप्त समय निर्धारित करें। यदि किसी बीमारी से ग्रसित हैं, तो दवाइयां लेकर साथ चलें। यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिकित्सकों द्वारा दी गई सलाह पर गंभीरता से विचार करें।

‘निचले क्षेत्रों में 24 घंटे बिताने के बाद जाएं उच्च हिमालय क्षेत्र में’
गोपेश्वर। चमोली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसपी कुड़ियाल ने बताया कि उच्च हिमालय क्षेत्रों में ऑक्सीजन कम होती है, जिससे बुजुर्गों, सांस की बीमारी, हृदय रोगियों को सांस से संबंधी दिक्कतें हो जाती है। फेफड़ों में सूजन आने से सांस लेना दूभर हो जाता है। इससे बचने के लिए तीर्थयात्रियों को यात्रा पर जाने के लिए पर्याप्त समय लेकर आना चाहिए।

उन्होंने बताया कि छह से आठ हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचने पर यात्री को यहां कम से कम 24 घंटे विश्राम करना चाहिए, जिससे शरीर में विपरीत प्रभावों से लड़ने की क्षमता पैदा हो जाती है। तीर्थयात्री पहले निचले क्षेत्रों में कुछ समय बिताने के बाद ही 10 हजार फीट की ऊंचाई पर सफर करें।

Related articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

15,000FansLike
545FollowersFollow
3,000FollowersFollow
700SubscribersSubscribe
spot_img

Latest posts

%d bloggers like this: