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Friday, September 30, 2022

संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार का एक परिचय,जिसमे बदलाव की लकीर खींच बनाया नया भारत,देहरादून संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार जी जन्मजात राष्ट्र भक्त थे उनके बाल्यकाल की अनेक घटनाएं 18 सो 97 में जब वे मात्र 8 वर्ष के थे इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया के राज्यारोहण के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में विद्यालय में दी गई मिठाई को कूड़ेदान में फेंक दिया पूछने पर बताया कि जिसने हमारे देश को परतंत्र बना रखा है उसके राज्य रोहन पर खुशी मनाना शर्म की बात है|

1901 में एडवर्ड सप्तम के राज्य रोहन के दिन नागपुर में की गई आतिशबाजी का भी विरोध एवं बहिष्कार अग्रवाल जी ने किया 1905 में अपने विद्यालय के विद्यार्थियों को साथ ले योजना बनाकर विद्यालय निरीक्षक के आगमन पर प्रत्येक कक्षा में उनका स्वागत वंदे मातरम के उद्घोष से किया जबकि उस समय ब्रिटिश शासन के समय वंदे मातरम बोलने पर प्रतिबंध था|इसे भी पढ़ें👈

परिणाम स्वरूप विद्यालय से निष्कासित हुए डॉक्टर की पढ़ाई हेतु विशेष उद्देश्य से कोलकाता गए क्योंकि उस समय कोलकाता में क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र था कोलकाता में अध्ययन के समय ही क्रांतिकारियों के प्रमुख संगठन अनुशीलन समिति के संपर्क आया और उस संगठन की गतिविधियों में सक्रियता से भाग लिया अंत संगठन के अंतरंग सदस्य भी बने अध्ययन समाप्त कर 1916 में नागपुर वापस आए परंतु डॉक्टर बनकर किसी रोगी की नाड़ी का परीक्षण नहीं किया उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व में चल रहे स्वाधीनता आंदोलन में भी भाग लिया|इसे भी पढ़ें👈

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