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Saturday, June 25, 2022
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हमारे जीवन मे हरियाली का मुख्य केंद्र बिंदु है हरेला – पदम् सिंह

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हमारे जीवन मे हरियाली का मुख्य केंद्र बिंदु है हरेला – पदम् सिंह

हरेला एक हिंदू त्यौहार है जो मूल रूप से उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में मनाया जाता है । हरेला पर्व वैसे तो वर्ष में तीन बार आता है-

हमारे जीवन मे हरियाली का मुख्य केंद्र बिंदु है हरेला – पदम्

1- चैत्र मास में – प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा जाता है।

2- श्रावण मास में – सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में बोया जाता है और दस दिन बाद श्रावण के प्रथम दिन काटा जाता है।

 

3- आश्विन मास में – आश्विन मास में नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा के दिन काटा जाता है।

चैत्र व आश्विन मास में बोया जाने वाला हरेला मौसम के बदलाव के सूचक है।

 

चैत्र मास में बोया/काटा जाने वाला हरेला गर्मी के आने की सूचना देता है,

तो आश्विन मास की नवरात्रि में बोया जाने वाला हरेला सर्दी के आने की सूचना देता है।

लेकिन श्रावण मास में मनाये जाने वाला हरेला सामाजिक रूप से अपना विशेष महत्व रखता तथा समूचे कुमाऊँ में अति महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक माना जाता है। जिस कारण इस अन्चल में यह त्यौहार अधिक धूमधाम के साथ मनाया जाता है। जैसाकि हम सभी को विदित है कि श्रावण मास भगवान भोलेशंकर का प्रिय मास है, इसलिए हरेले के इस पर्व को कही कही हर-काली के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि श्रावण मास शंकर भगवान जी को विशेष प्रिय है।

 

 

यह तो सर्वविदित ही है कि उत्तराखण्ड एक पहाड़ी प्रदेश है और पहाड़ों पर ही भगवान शंकर का वास माना जाता है। इसलिए भी उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला का अधिक महत्व है। हरियाली या हरेला शब्द पर्यावरण के काफी करीब है। ऐसे में इस दिन सांस्कृतिक आयोजन के साथ ही पौधारोपण भी किया जाता है। जिसमें लोग अपने परिवेश में विभिन्न प्रकार के छायादार व फलदार पौधे रोपते हैं।

 

सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थालीनुमा पात्र में मिट्टी डालकर गेहूँ, जौ, धान, गहत, भट्ट, उड़द, सरसों आदि 5 या 7 प्रकार के बीजों को बो दिया जाता है। नौ दिनों तक इस पात्र में रोज सुबह को पानी छिड़कते रहते हैं। दसवें दिन इसे काटा जाता है। 4 से 6 इंच लम्बे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है। घर के सदस्य इन्हें बहुत आदर के साथ अपने शीश पर रखते हैं। घर में सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में हरेला बोया व काटा जाता है!

 

हरेला गीत/आशीर्वाद

 

जी रया .. जागि रया .. यो दिनबार भेटने रया .. दुबक जस जड़ हैजो .. पात जस पौल हैजो .. स्यालक जस बुद्धि हैजो .. बाघक जस त्राण हैजो .. हिमालय में ह्यूं हुन तक , गंगा में पाणि छन तक हरेला त्यार मनाते रया .. मनाते रया … ॥

 

जिला पंचायत चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चाणक्य बनकर उभरे मोहित बेनीवाल

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