सर संघचालक मोहन भागवत ने परिवार प्रबोधन कार्यक्रम में लोगो को कुटुंब के लिए छह मंत्र दिए है । भागवत भाषा, भोजन, भजन, भ्रमण, भूषा और भवन के जरिये अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया है । उन्होंने कहा कि जैसे यहां पर परिवार प्रबोधन हो रहा है, उसी तरह सप्ताह में सभी परिवार कुटुंब प्रबोधन करें , एक दिन परिवार के सभी लोग एक साथ भोजन ग्रहण करें, इसमें अपनी परंपराओं, रीति रिवाजों की जानकारी दें। फिर आपस में चर्चा करें और एक मत बनाएं और उस पर कार्य करें। परिवार में बहुत बदलाव आएगा  

संघ प्रमुख मोहन भागवत

कोटद्वार के आम्रपाली में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि घर में अपनी भाषा बोलनी चाहिए। हालांकि, कोई अन्य भाषा भी सीखने का चलन बढ़ना चाहिए। कोई पर्व, त्योहार है तो अपने पारंपरिक वेषभूषा धारण करें। भागवत ने कहा कि हमारे देश में करीब 800 प्रकार के भोजन हैं, इनका सेवन करें। ऐतिहासिक उत्तराखंड के कई प्रकार के भोजन हैं, हमे उनका सेवन करना चाहिए। कभी-कभी बाहर का भोजन तो ठीक है, लेकिन सामान्य तौर पर अपनी आबोहवा के अनुकूल भोजन ग्रहण करें। 

मोहन भागवत ने भ्रमण पर कहा कि पूरी दुनिया देखनी चाहिए, लेकिन काशी, चित्तौड़गढ़ से लेकर हल्दीघाटी, जलियांवाला बाग भी देखना चाहिए। अपने घर के अंदर महात्मा गांधी, भगत सिंह, डॉ. आंबेडकर, वीर सावरकर आदि के चित्र लगाने चाहिए।

वेलकम शब्द पर उठाया सवाल
घर पर वेलकम शब्द क्यों? सुस्वागत क्यों नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामायण में कुटुंब की कहानी है, इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। कुटुंब बनेगा तो उससे समाज बनेगा। इससे सोया हुआ राष्ट्र जागेगा और भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहने वालों के ऊपर पूरे समाज की जिम्मेदारी होती है। अपने परिवार के साथ आसपास के लोगों की भी चिंता करें। 

इससे पहले सर संघचालक भागवत, क्षेत्र संघचालक डॉ. राम उजागर, प्रांत संघचालक डॉ. राकेश भट्ट, विभाग संघचालक सूर्य प्रकाश टोंक, जिला संचालक डॉ. नीलांबर भट्ट, नगर संचालक विवेक कश्यप ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संबोधन सुनने के लिए एक हजार परिवारों के लोग पहुंचे थे। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया गया।

छोटे-छोटी बातों के जरिये दिया बड़ा संदेश
मोहन भागवत ने करीब एक घंटे तक संबोधन दिया। उन्होंने छोटी- छोटी बातों और उदाहरणों के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने पर्यावरण, जल संरक्षण से लेकर दकियानूसी विचारों पर अपनी बात रखी। कहा कि हरित घर बनाएं। परिवार के लोग एक पौधा जरूर लगाएं। हरियाली की वृद्धि करें। पर्यावरण को जीतना नहीं है, उसे देते भी रहना है।

उन्होंने कहा की पानी को बचाना चाहिए। और छुआछूत जैसी दकियानूसी बातों से दूर रहने के लिए कहा। कहा कि छुआछूत को नकारें। यह भी कहा कि भारत माता के सब लाल हैं। हममें कोई भेद नहीं है। उन्होंने सामाजिक समरसता की बात कही है ।उन्होंने कहा है की हमे सर्व भारत में समरसता का भाव लाना है सबको मिलकर रहना है अपने परिवार कुटुंब को आगे लेकर जाना है

अपने महापुरुषों के बारे में सभी को बताना है की हम शहीद भगत सिंह,महाराणा प्रताप महारानी लक्ष्मी बाई जैसे अनेक महापुरुषों की देन जिन्होंने कभी भी समझौता नहीं किया हमेशा देश के लिए अपने धर्म के लिए प्राण न्योछावर किये

मोहन भगवत ने कहा है ये देश महापुरुषों का देश गई यहाँ संस्कार सभ्यता सिखाई जाती हमे अपनी भाषा को अपनाना होगा उसको दुनिया के सामने रखना होगा हमारी पहचान हमारी वेशभूषा को हमे दुनिआ के सामने रखना होगा।

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